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मां.... एक पिता

             मां.... एक पिता जो औरत एक बच्चे को पैदा कर सकती है उसके लिए अपने बच्चों को पालना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। औरत अकेले बच्चे पाल नहीं सकती ये धारणा समाज के द्वारा बनाया गई है और यह बात शुरू से हर लड़की के दिमाग में छाप दी जाती है और फिर कहीं ना कहीं यह उसके थिंकिंग प्रोसेस का हिस्सा बन जाती है और वो धीरे-धीरे इस बात को मान ही लेती है कि हां, उसके बच्चे के लिए पिता का होना जरूरी है भले ही वो उस संबंध में भावनात्मक और मानसिक रूप से अनुपस्थित हो। अब होता ये है कि इस पंगु से रिश्ते में सब साथ बने रहते हैं क्योंकि समाज एक मां और उसके बच्चे को कभी भी एक पिता नाम की चीज़ के बिना एक्सेप्ट नहीं करेगा और नाम के लिए ही सही, सरकारी कागज़ों पर पिता का कॉलम खाली न रहे इसलिए यह नासूर पालता रहता है, केवल इसी कारण से एक औरत किसी गलत इंसान के साथ अपने जीवन का एक लंबा समय बिता देती है और अपने बच्चों को भी एक ऐसे व्यक्ति के साथ रहने पर मजबूर करती हैं जो कि सबके लिए विकृत माहौल बनाए रखता है। मेरी ये बात सामान्यतः समझ में आने वाली नहीं है लेकिन जो कोई भी ऐसे ...

काश तुम कभी मिले ना होते...

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काश तुम कभी मिले ना होते, चार कदम हम साथ चले ना होते, इस बहार की उम्र बहुत कम थी, गुलशन फिर से वीरान हुए ना होते। चले ही जाने के लिए कोई आता है क्यों? आकर कोई ठहर जाता नहीं क्यों? ठहर के पास बैठ जाता नहीं क्यों? कब तक दिल की चौखट से यूं किसी को विदा किया जाए, कभी तो यूं हो कि काश कोई हमेशा के लिए रुक जाए। क्यों ना मिलकर कोई नया पौधा जिंदगी की क्यारी में रोपे हम, किसी कली को फूल बनते साथ देखें हम, बहारें आयें, फूल खिलायें, हमारा लगाया पौधा पेड़ बन हमें अपने साये के नीचे सुलाये, वो नींद, वो सपने बहुत मीठे होंगे, जो हम एक दूसरे की आंखों से देखेंगे, न जाने कितने सालों से हम नहीं सोए, कभी तो बालों में उंगलियां फंसा कर कोई ये सुलझाएं, कब तक दिल की चौखट से यूं किसी को विदा किया जाए।

LET GO...

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धीरे-धीरे हम लोग उम्र के उसे दौर में आ गए हैं जहां हम बहुत कुछ खो चुके हैं...खो चुके हैं उन्हें जिन्हें हम बहुत चाहते थे जो एक वक्त हमारे थे हमें चाहते थे, हम खो चुके हैं अपने सबसे प्यारे खिलौने, सबसे पसंदीदा ड्रेस, सबसे प्यारा दोस्त और सबसे अज़ीज़ प्यार लेकिन सब कुछ खो देने के बाद भी हम आगे बढ़ गए बहुत सारा grief बहुत सारा pain अपने अंदर समेटे हुए। हमने अपने मन के भीतर इनकी तह लगा रखी हैं, याद नहीं करना चाहते फिर भी सब कुछ याद है और रोज़ यह सब खुद को समझाते हुए भी हम मुस्कुराते हैं और पूरी कोशिश करते हैं कि यह किसी को भी ना पता चले की हमने क्या-क्या खो दिया है। हम हार गए हैं लेकिन हारे हुए दिखाना नहीं चाहते। अब हम let go के एक्सपर्ट हो गए हैं लेकिन चली गई चीजों का सम्मान हमने उसी जगह पर बनाए रखा है। उम्र के उस दौर में आ चुके हैं जहां किसी चीज़ का चले जाना अब ज्यादा परेशान नहीं करता क्योंकि शायद उस बेचैनी को उसकी तकलीफ़ की सारी हदें हम पार कर आए हैं, अब ऐसा लगता है कि खोने के लिए हमारे पास कुछ भी नहीं है और फिर भी हम रोज़ सब कुछ खोने के लिए तैयार बैठे हैं। अब पहले जैसा कुछ भी शायद हमें न...

पिताओं को भी हैप्पी मदर्स डे

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आज हर चीज के लिए दिन और समय निश्चित है आप चाहे साल भर अनकंडीशनली प्रेम निभायें, भावना लुटायें, अपने दायित्वों को पूरा करें लेकिन उन सब का मूल्यांकन और उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट इसी एक निश्चित दिन ही सौंप जाएगी। वैसे मेरा इन दिवसों के प्रति ना कभी विरोध रहा है ना कोई विशेष उत्साह, क्योंकि हम एक सामाजिक संरचना में बंधे हुए हैं तो चाहें या ना चाहें हम इन सब का हिस्सा अनायास ही बन जाते हैं। आज मदर्स डे है क्योंकि मातृ दिवस जैसा तो कभी इतिहास में कुछ रहा नहीं... शायद मां को परिभाषित करना इस संसार का दुरूह विषय है। जहां तक मैंने जाना और समझा है मां बनना जितना शारीरिक रूप से कठिन है उससे ज्यादा कठिन है मानसिक और भावनात्मक रूप से मां बनना, शायद बहुत सी पत्नियां इसीलिए पत्नी बनी रहना चाहती हैं क्योंकि अब वह एक मां हैं। शारीरिक रूप से मां बनने के बाद 6 महीने में कष्ट भूलने लगता है लेकिन मानसिक और भावनात्मक स्तर पर रोज़, हर पल नई चुनौतियों के लिए न जाने कितने युद्ध खुद से ही लड़ने पड़ते हैं। आप एक-दो रात ना सोएं तो यह चिड़चिड़ाहट हर किसी पर ज़ाहिर हो जाती है लेकिन महीनों ढंग से ना सोई मां रातों को ज...

International Men's Day

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  कहते हैं की हर सफल इंसान के पीछे एक औरत का हाथ होता है, लेकिन सच यह भी है की एक सफल औरत के पीछे भी एक मर्द का हाथ होता है, फिर चाहे वह पिता हो, भाई हो, पति हो, चाचा हो, मामा हो, गुरु हो या दोस्त हो | मैं खुशनसीब हूं की मुझे जीवन में पुरुषों का हमेशा सकारात्मक साथ मिला अपने पिता, गुरु, बड़े भाइयों के मार्गदर्शन मैं मैंने बहुत कुछ सीखा आप सभी का  बहुत-बहुत शुक्रिया जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मुझे मेरे हिस्से की ज़मीन और उड़ने को आसमान दिया। एक या दो बुरे अनुभवों के कारण हम समाज के एक बड़े हिस्से को हमेशा गलत की श्रेणी में नहीं रख सकते पुरुष या स्त्री प्रकृति की देन है सृष्टि को संतुलन में रखने के लिए एक तराजू के दो पलड़े हैं, जब दोनों बराबर रहेंगे तभी सब कुछ संतुलित रहेगा। उन सभी पुरुषों का हृदय तल से धन्यवाद जिन्होंने यह साबित किया के समाज आज भी महिलाओं को सम्मान देता है, सुरक्षा देता है और उनकी भागीदारी का सम्मान करता है। मेरे विश्वास को बनाए रखने के लिए दिल से शुक्रिया 🌷

Happy Friendship's Day

                               हप्पी फ्रेंडशिप-डे  यूं तो आज के दिन पूरी दुनिया में फ्रेंडशिप डे की धूम है लेकिन मुझे लगता है कि दोस्ती में जब तक जिंदगी है तब तक हर दिन फ्रेंडशिप डे है और यही समझने में हम अक्सर आधी जिंदगी बिता देते हैं- जैसे मैं। मेरे कुछ दोस्त बचपन से आज तक साथ है कुछ खून के रिश्ते दोस्ती में बदल गए कुछ प्रोफेशनल रिश्ते अब दोस्त बन चुके हैं फिलहाल मैं यह कह सकती हूं कि  हां, मेरे साथ ऐसे दोस्त है जो मेरी बकवास घंटों तक सुनते हैं मेरी बिन सिर पैर की बातों पर मेरे साथ बेवजह हंसते हैं, चेहरा देख कर मेरे साथ हुए कांड का पता लगा लेते हैं,जब लगता है कुछ गलत होने जा रहा मुझसे तो पूरे अधिकार से डांट डपट भी देते हैं मेरी जली कटी सुनते भी हैं अपनी सुनाते भी हैं फिलहाल दोस्तों के साथ जिंदगी गुलजा़र है। गार्गी बिटिया ने घर के बाहर के रिश्तो को अब बनाना शुरू किया है या यूं कहिए की बालपन में रिश्ते अपने आप ही बन जाते हैं। बच्चे मासूम होते हैं उन्हें कुछ भी करना नहीं होता है उनके साथ चीजें अपने ...

Open Letter to Gargi

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 मेरी प्यारी गार्गी, बहुत दिनों बाद आज तुमको फिर यह खुला पत्र (ओपन लेटर) लिख रही हूं, आज का दिन तुम्हारी जिंदगी का महत्वपूर्ण दिन है। समय वाकई बहुत जल्दी बीत रहा है! और उसी समय की धारा के साथ बहते-बहते तुम इतनी बड़ी हो गई कि आज तुम्हारी फॉर्मल स्कूलिंग शुरू हो गई। सबसे पहले, तुम्हें तुम्हारा पहला स्कूल बहुत-बहुत मुबारक हो और मुझे मेरा नया नाम- Gargi's mother ❤️ जब तुम पैदा हुई थी तब भी मैंने एक पत्र तुम्हें लिखा था जिसमें मैंने कहा था कि तुम अपने लिए जीना,अपनी शर्तों पर जीना,अपने लिए कुछ बनना,अपने लिए हासिल करना। मेरा या किसी का नाम रोशन करने के लिए नहीं बल्कि जो करना अपनी संतुष्टि और खुशी के लिए करना। क्योंकि अगर तुमने हमारे लिए या हमारे कहने से कुछ कर भी दिया और तुम जीवन भर असंतुष्ट रहीं तो वो असंतुष्टि तुमको चैन से जीने नहीं देगी। जिंदगी का कोई भी रास्ता सही है या गलत इसका परिचय मैं तुम्हें समय-समय पर कराती रहूंगी पर हर समय नहीं क्योंकि किस रास्ते को चुनना है और चुने हुए रास्ते पर किस तरह आगे बढ़ना है इसकी समझ तुम्हें अपने आप बनानी होगी। जन्म संस्कार और मृत्यु संस्कार से भी ज्या...

पुनरावृति

 तेज बारिश, काले बादल और गरजते बादलों के बीच अपने वजूद को बचाता हुआ एक छोटा सा पेड़ जिसका तना एकदम पतला है और उसी तने से लगी चंद पत्तियों को  उसने बखूबी संभाला हुआ है ! और यह छोटा सा पेड़ हमें कितना कुछ सिखा जाता है ! हमारे आगे पेड़ -पौधे जिनको हम निर्जीव मानते हैं या यह कह लीजिए कि मानव शक्ति के आगे एकदम तिनका मात्र हैं हमें वटवृक्ष जैसी मजबूत सीख दे देते हैं। इन्हें देख कर लगता है आत्मसम्मान को बचाए रखने की प्रबल इच्छा इनमें भी है जो इस बवंडर से तूफान में देखते ही बनती है, किस तरह से हवा का वेग इस पौधे को गिराने के लिए आतुर है और यह वेग से विपरीत सीधा रहने के लिए रहने पर आमादा है। हम रोज ही कभी किसी वजह से कभी बिना कारण तोड़े जाते हैं अपने मन पर अब तक हम ना जाने कितनी ठेस लिए बैठे हैं फिर भी अगर हम बिना बदले की भावना लिए खुद को ऐसी परिस्थितियों से उबारकर अपना सिर ऊंचा करके खुद की जमीन को ठोस बना रहे हैं तो हम अपने आप में सम्मानित हैं । लेट मानसून की पहली बारिश ने जीवन का एक पाठ फिर से याद दिलवा दिया।  देर आए दुरुस्त आए! 

एक इतवार तुम्हारा... एक इतवार मेरा

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        एक  इतवार  तुम्हारा... एक इतवार मेरा अब तो इतवार के इंतजार में पूरा इतवार बीत जाता है लेकिन मेरा इतवार नहीं आता, हर दिन सुबह से समय को कामों के पाटों के बीच पीसते पीसते और तुम्हारे मकान को घर बनाते बनाते  सोम-मंगल-बुध बीतते हैं इतवार के इंतजार में वो इतवार जो कभी हमारे लिए सुकून के दो पल नहीं लाता लाता है... सिर्फ तुम्हारी छुट्टी... तुम्हारी मौज मस्ती तुम्हारी सुबह की मस्त सैर और शाम दोस्तों संग तफ़रीह मुझे तो संभालनी है तुम्हारी रसोई और बिस्तर जहाँ तुम्हें चाहिए सब गरमा-गरम तुम्हारी फरमाइशों का लेखा-जोखा और सब कुछ  हो वैसा चाहो तुम जैसा वो बच्चे जिनके नाम के पीछे तुम्हारा नाम लगते ही सबके चेहरे चमक उठते हैं वो भी तुमसे कहाँ कुछ कहते हैं ? मां ये चाहिए... ऐसा काम कर दो... से लेकर मां तुमने तो ये अभी तक किया ही नहीं... तक मां तुम ही पापा से कह देना, उनके पास हमारे लिए समय नहीं! लेकिन मैं किससे कहूं ?- कि उनके पास तो मेरे लिए भी वक्त नहीं मैं.... मैं शायद वो हिस्सा हूँ जिंदगी का जिसके न होने से तो सब बिगड़ सकता है लेकिन होने से कोई खास फर्क ...
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                                        होली मुबारक !! गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में| बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में|| नहीं ये है गुलाल-ए-सुर्ख़ उड़ता हर जगह प्यारे| ये आशिक़ की है उमड़ी आह-ए-आतिश-बार होली में|| गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो| मनाने दो मुझे भी जान-ए-मन त्यौहार होली में|| 'रसा' गर जाम-ए-मय ग़ैरों को देते हो तो मुझ को भी| नशीली आँख दिखला कर करो सरशार होली में||
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     70वां गणतंत्र मुबारक ! लोकतंत्र का पर्व मुबारक ! आप सभी को गणतंत्र देश होने के 70 वर्ष की शुभकामनाएं ! अक्सर ही 26 जनवरी या 15 अगस्त आते ही देश के प्रति हमारी लघु देशभक्ति तो जाग ही जाती है और साथ में ढेरों सवाल-जवाब और आकलन भी शुरू हो जाते हैं | कभी-कभी ऐसी कई चर्चाओं का मैं भी हिस्सा बन जाती हूं, लेकिन सच बताऊं आज भी ढेरों ऐसी वजह है जो मेरा सिर फक्र से ऊंचा करती हैं कि मैं भारत में पैदा हुई और मैं इस बात से भी इनकार नहीं करती कि बहुत सी ऐसी भी वजह है जिसके कारण कुछ उंगलियां हमारी तरफ उठ जाती हैं | आज 70 वां गणतंत्र दिवस हम मना रहे हैं लेकिन आज भी मुझे मेरा देश 70 साल का युवा ही लगता है, बिल्कुल जवान और उसका एक कारण भी है, वह यह कि जिसकी 29 औलादें हो वो कैसे बूढ़ा हो सकता है ? उसको तो अभी बहुत कुछ संभालना है कश्मीर जैसे बेटे से लेकर कन्याकुमारी सी बेटी, ऐसी 29 बेटे-बेटियों का पिता भारत कभी बूढ़ा नहीं होता, और इतने बड़े परिवार में अगर कुछ थोड़ी बहुत अनबन होती है तो यह तो स्वाभाविक सी बात है ! लेकिन बाकी सब यह जान लें कि जब हमारे ऊपर कोई विपत्ति आती है तो ...
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  ऊर्जा और ज्ञान का महासागर : स्वामी विवेकानंद   हमारे देश भारत में एक मठवासी संत जिन्होंने अपने छोटे से जीवन काल में अपने कामों की वजह से प्रसिद्धि हासिल की और केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके ज्ञान और मंतव्यों का लोहा माना गया ऐसे सिर्फ एक ही महापुरुष थे, स्वामी विवेकानंद | किसी भी देश के महापुरुष उस देश के लिए ऊर्जा और ज्ञान का महासागर होते हैं | स्वामी विवेकानंद को आप संकल्पशक्ति, विचारों की ऊर्जा,अध्यात्म और आत्मविश्वास का अथाह सागर मान सकते हैं | स्वामी विवेकानंद ऐसे महापुरुष थे जिन्हें भारत और भारत के बाहर भी वही सम्मान और प्रेम मिला | जिस दौर में स्वामी विवेकानंद अपने जीवन के शिखर पर थे उस दौर में भारत अंग्रेजों का गुलाम था, गुलाम भारत की युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए स्वामी विवेकानंद ने कहा था," उठो, जागो ! और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए | तुम जो सोच रहे हो उसे जिंदगी का विचार बनाओ| उसके बारे में सोचो, उसके लिए सपने देखो, उस विचार के साथ जियो | तुम्हारे दिमाग में, तुम्हारी मांसपेशियों में, तुम्हारी नसों में और तुम्हारे शर...
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        नई चेतना, नई ऊर्जा का त्यौहार मनाएं......                           आओ नववर्ष मनाएं मयस्सर डोर से फिर एक मोती झड़ रहा है, तारीखोंं के जीने से दिसंबर उतर रहा है, कुछ चेहरे घटे, कुछ यादें जुड़ गई वक्त में, उमर का पंछी नित दूर-दूर उड़ रहा है, गुनगुनी धूप और ठिठुरती रातें जाड़े की, गुजरे लम्हों पर भी झीना झीना पर्दा गिरा रहा है,  जा़यका लिया नहीं जिंदगी का और फिसल रही है जिंदगी, आसमां समेटता वक्त, बादल बन उड़ रहा है, फिर एक दिसंबर गुजर रहा है........ हर साल हम यही सोचते हैं कि यह साल बहुत जल्दी बीत गया | साल का आखिरी महीना इसी उधेड़बुन में निकल जाता है कि जाता हुआ यह साल हमें क्या दे गया या हमसे क्या लेकर चला गया | हर साल की यही कहानी है, हर साल नया साल आएगा कुछ ना कुछ सिखाएगा जिंदगी की किताब में कुछ नए अध्याय जोड़ कर जाएगा और हम हर साल पुराने सालों की याद करेंगे | नए साल के बहाने हमें एक मौका मिलता है जब हम पीछे मुड़कर देख सकते हैं कि हमने अपने साथ क्या किया, अपने आस...
           अपनी समझ का इस्तमाल कीजिये विचारणीय ...... मुफ़्तख़ोरी की पराकाष्ठा! मुफ़्त ऋण मुफ़्त दवा, मुफ़्त जाँच, लगभग मुफ़्त राशन, मुफ़्त शिक्षा, बच्चा पैदा करने पर पैसे , बच्चा पैदा नहीं (नसबंदी)करने पर पैसे, स्कूल में खाना मुफ़्त ,  मुफ़्त बाँटने की होड़ मची है, पिछले दस सालों से लेकर आगे बीस सालों में एक एसी पूरी पीढ़ी तैयार हो रही है या हमारे नेता बना रहे हैं जो पूर्णतया मुफ़्त खोर होगी! अगर आप उनको काम करने को कहेंगे तो वो गाली देकर कहेंगे की सरकार क्या कर रही है! ये मुफ़्त खोरी की ख़ैरात कोई भी पार्टी अपने फ़ंड से नही देती टैक्स दाताओं का पैसा इस्तेमाल करती है! हम नागरिक नहीं परजीवी तैयार कर रहे हैं! देश का अल्प संख्यक टैक्स दाता बहुसंख्यक मुफ़्त खोर समाज को कब तक पालेगा ? जब ये आर्थिक समीकरण फ़ेल होगा तब ये मुफ़्त खोर पीढ़ी बीस तीस साल की हो चुकी होगी जिसने जीवन में कभी मेहनत की रोटी नही खाई होगी हमेशा मुफ़्त की खायेगा !नहीं मिलने पर, ये पीढ़ी नक्सली बन जाएगी , उग्रवादी बन जाएगी पर काम नही कर पाएगी ! सोचने की बात है कि सरक...
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        औरत भी...... मर्द भी.......   हर साल आप और हम 8 मार्च के दिन महिला दिवस को बहुत गंभीरता से मनाते हैं और अपने आस-पास मौजूद महिलाओं को उनके योगदान के लिए धन्यवाद करते हैं. ऐसे मौके पर कई पुरुष मजाकिया तौर पर पूछते हैं कि 'भई पुरुष दिवस भी होता है क्या'? उनके लिए जवाब है जी हां, और ये दिवस आज यानि 19 नवंबर को मनाया जाता है. 19 नवंबर 2017 के दिन अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस होता है. जानिए आखिर कब हुई इस दिन को मनाने की परंपरा की शुरुआत - 7 फरवरी 1992 के दिन मिसौरी यूनिवर्सिटी, अमेरिका के प्रोफेसर थॉमस योस्टर की कोशिशों के बाद पहली बार अमेरिका, कनाडा, यूरोप के कुछ देशों में कुछ संगठनों ने पहली बार अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया. हालांकि 1995 के ईवेंट में कम लोगों की दिलचस्पी के बाद से ही कई देशों ने फरवरी में ये दिन मनाना बंद कर दिया. काफी समय तक माल्टा ही इकलौता देश बचा था जो इस दिन को फरवरी में मनाता था. हालांकि अलग-अलग देश इस दौरान अपने हिसाब से पुरुष दिवस मना रहे थे. डॉ. जीरोम तिलकसिंह त्रिनिडाड एंड टोबेगो के वासी थे. उन्होंने फिर से बीड़ा ...
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                  रा से राम......रा से रावण...... आजकल हर त्योहार की शुरुआत होती है सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर शुभकामना संदेशों के आने से | नवरात्री और फिर दशहरा की शुरुआत भी ढेरों अलग-अलग तरह की शुभकामनाओं के संदेशों से हुई, संदेश बनाने वाले और सोचने वाले भी बहुत ही सृजनात्मक होते हैं | जैसे ही आज यह मैसेज देखा उस समय लगा कि क्रिएटिविटी की कोई हद नहीं है, इंसानी बुद्धि की सोच का कोई अंत नहीं है | तभी से बहुत तरह के विचार बार-बार ज़हन में आ रहे हैं, कितने साधारण रुप से लिखा है ! 'रा' से ही राम की शुरुआत होती है और 'रा' से ही रावण की लेकिन दोनों का अंत कितना अलग है ! हमारे जीवन में भी यह कितना कितना सटीक बैठता है, हम शून्य से शुरू करते हैं..... कोई दहाई तक पहुंचता है..... कोई सैकड़ा तक..... कोई हजार तक तो कोई लाख तक...... सब का अंत अलग अलग है | वास्तव में जीवन में महत्वपूर्ण क्या है ? शून्य से शुरुआत करना और अंत में आपके कर्म के पीछे, आपकी उपलब्धियों के पीछे कितने शून्य लगे हैं यह महत्वपूर्ण है यानी कि आप दस नंबरी हैं यह सौ नंबरी य...
  ऊचांई पर पहुंच कर क्या संवेदनाएं मर जाती हैं ?      हर चीज के दो पहलू होते हैं, 'गलती' भी एक ऐसी चीज है जिसके दो पहलू हैं, निकालनी हो तो सबसे आसान लगती है खुद को स्वीकार करना हो तो असंभव सा लगने लगता है | यह मानव स्वभाव है, जो हम दूसरे में सबसे पहले देखते हैं वह है उसकी गलती और जो हम खुद में सबसे पहले छुपाते हैं वह है अपनी गलती... खैर... यह स्वभाव है जिसे दूर करना मुश्किल है | बहुत कम ही ऐसे लोग है जो अपने व्यक्तित्व के दोनों पहलू देखते हों और वे अपवाद हैं | पिछले कुछ दिनों से लखनऊ का हत्याकांड देख रही हूं, पढ़ रही हूं, सुन रही हूं लेकिन कुछ समझ नहीं पा रही हूं | अभी तक जितनी भी रूपरेखा बनी है उससे तो हत्याकांड ही लग रहा है और कार्यवाही चल रही है लेकिन उससे भी ज्यादा कष्ट जिस चीज को देखकर हो रहा है वह यह कि कुछ पुलिस वाले सोशल मीडिया पर एडिटेड मैसेज चला रहे हैं,  कह रहे हैं कि या तो मुझे अनफ्रेंड कर दो या मेरी फ्रेंड लिस्ट से हट जाओ मेरा नंबर डिलीट कर दो... हर विभाग में यूनिटी होती है यह अच्छी बात है और होनी भी चाहिए लेकिन संवेदना नहीं मरनी चाहिए | पब्लि...
हर देश की अपनी एक विशेषता है, मेरे देश की विशेषता है इसकी भिन्नता| "परी हो तुम गुजरात की, रूप तेरा मद्रासी ! सुन्दरता कश्मीर की तुम में, सिक्किम जैसा शर्माती !! खान-पान पंजाबी जैसा, बंगाली जैसी बोली ! केरल जैसी आंख तुम्हारी, है दिल तो तुम्हारा दिल्ली !! महाराष्ट्र तुम्हारा फ़ैशन है, तो गोवा नया जमाना ! खुशबू हो तुम कर्नाटक की, बल तो तेरा हरियाणा !! सीधी-सादी उड़ीसा जैसी, एम.पी. जैसा मुस्काना ! दुल्हन तुम राजस्थानी जैसी, त्रिपुरा जैसा इठलाना !! झारखंड तुम्हारा आभूषण, तो मेघालय तुम्हारी बिन्दीया है ! सीना तुम्हारा यू.पी है तो, हिमाचल तुम्हारी निन्दिया है !! कानों का कुंडल छत्तीसगढ़, तो मिज़ोरम तुम्हारी पायल है, बिहार गले का हार तुम्हारा, तो आसाम तुम्हारा आंचल है !! नागालैंड- आन्ध्र दो हाथ तुम्हारे, तो ज़ुल्फ़ तुम्हारी अरुणाचल है ! नाम तुम्हारा भारत माता, तो पवित्र तुम्हारा उत्तरांचल है !! सागर है परिधान तुम्हारा, तिल जैसे है दमन-द्वीव ! मोहित हो जाता है सारा जग, रहती हो तुम कितनी सजीव !! अंडमान और निकोबार द्वीप, पुष्पों का गुच्छ तेरे बालों में ! झिल-मिल, झि...

खुद को परखें

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                                                                                          खुद को परखें अमूमन बचपन में हम सब के पास चाबी वाले खिलौने रहे होंगे अौर उसकी कार्य प्रणाली से भी हम सब वाकिफ हैं | इसका सीधा साधा फार्मूला है कि हमने चाबी भरी और उस खिलौने को चलाया, जितनी चाबी भरी उतना ही खिलौना चलता है, चाहे वह कलाबाज़ी करने वाला बंदर हो, ड्रम या झुनझुना बजाने वाला जोकर या कमर मटका कर नाचने वाली गुड़िया | वैसे हर खिलौने की क्षमता या कार्यप्रणाली खेलने वाले पर ही निर्भर होती है लेकिन चाबी वाले खिलौने मुझे बचपन से ही विचित्र मालूम होते थे | कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरे अंदर यह विचार कहीं ना कहीं पनप रहा था कि आगे चलकर हमारी चाबी भी किसी और के हाथ में ना चली जाए ! और आज शायद हुआ भी वही | आज जो हम बनते जा रहे हैं वो दूसरों की ही देन है, क्योंकि हम जो वास्तविकत...