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काश तुम कभी मिले ना होते...

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काश तुम कभी मिले ना होते, चार कदम हम साथ चले ना होते, इस बहार की उम्र बहुत कम थी, गुलशन फिर से वीरान हुए ना होते। चले ही जाने के लिए कोई आता है क्यों? आकर कोई ठहर जाता नहीं क्यों? ठहर के पास बैठ जाता नहीं क्यों? कब तक दिल की चौखट से यूं किसी को विदा किया जाए, कभी तो यूं हो कि काश कोई हमेशा के लिए रुक जाए। क्यों ना मिलकर कोई नया पौधा जिंदगी की क्यारी में रोपे हम, किसी कली को फूल बनते साथ देखें हम, बहारें आयें, फूल खिलायें, हमारा लगाया पौधा पेड़ बन हमें अपने साये के नीचे सुलाये, वो नींद, वो सपने बहुत मीठे होंगे, जो हम एक दूसरे की आंखों से देखेंगे, न जाने कितने सालों से हम नहीं सोए, कभी तो बालों में उंगलियां फंसा कर कोई ये सुलझाएं, कब तक दिल की चौखट से यूं किसी को विदा किया जाए।

LET GO...

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धीरे-धीरे हम लोग उम्र के उसे दौर में आ गए हैं जहां हम बहुत कुछ खो चुके हैं...खो चुके हैं उन्हें जिन्हें हम बहुत चाहते थे जो एक वक्त हमारे थे हमें चाहते थे, हम खो चुके हैं अपने सबसे प्यारे खिलौने, सबसे पसंदीदा ड्रेस, सबसे प्यारा दोस्त और सबसे अज़ीज़ प्यार लेकिन सब कुछ खो देने के बाद भी हम आगे बढ़ गए बहुत सारा grief बहुत सारा pain अपने अंदर समेटे हुए। हमने अपने मन के भीतर इनकी तह लगा रखी हैं, याद नहीं करना चाहते फिर भी सब कुछ याद है और रोज़ यह सब खुद को समझाते हुए भी हम मुस्कुराते हैं और पूरी कोशिश करते हैं कि यह किसी को भी ना पता चले की हमने क्या-क्या खो दिया है। हम हार गए हैं लेकिन हारे हुए दिखाना नहीं चाहते। अब हम let go के एक्सपर्ट हो गए हैं लेकिन चली गई चीजों का सम्मान हमने उसी जगह पर बनाए रखा है। उम्र के उस दौर में आ चुके हैं जहां किसी चीज़ का चले जाना अब ज्यादा परेशान नहीं करता क्योंकि शायद उस बेचैनी को उसकी तकलीफ़ की सारी हदें हम पार कर आए हैं, अब ऐसा लगता है कि खोने के लिए हमारे पास कुछ भी नहीं है और फिर भी हम रोज़ सब कुछ खोने के लिए तैयार बैठे हैं। अब पहले जैसा कुछ भी शायद हमें न...

पिताओं को भी हैप्पी मदर्स डे

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आज हर चीज के लिए दिन और समय निश्चित है आप चाहे साल भर अनकंडीशनली प्रेम निभायें, भावना लुटायें, अपने दायित्वों को पूरा करें लेकिन उन सब का मूल्यांकन और उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट इसी एक निश्चित दिन ही सौंप जाएगी। वैसे मेरा इन दिवसों के प्रति ना कभी विरोध रहा है ना कोई विशेष उत्साह, क्योंकि हम एक सामाजिक संरचना में बंधे हुए हैं तो चाहें या ना चाहें हम इन सब का हिस्सा अनायास ही बन जाते हैं। आज मदर्स डे है क्योंकि मातृ दिवस जैसा तो कभी इतिहास में कुछ रहा नहीं... शायद मां को परिभाषित करना इस संसार का दुरूह विषय है। जहां तक मैंने जाना और समझा है मां बनना जितना शारीरिक रूप से कठिन है उससे ज्यादा कठिन है मानसिक और भावनात्मक रूप से मां बनना, शायद बहुत सी पत्नियां इसीलिए पत्नी बनी रहना चाहती हैं क्योंकि अब वह एक मां हैं। शारीरिक रूप से मां बनने के बाद 6 महीने में कष्ट भूलने लगता है लेकिन मानसिक और भावनात्मक स्तर पर रोज़, हर पल नई चुनौतियों के लिए न जाने कितने युद्ध खुद से ही लड़ने पड़ते हैं। आप एक-दो रात ना सोएं तो यह चिड़चिड़ाहट हर किसी पर ज़ाहिर हो जाती है लेकिन महीनों ढंग से ना सोई मां रातों को ज...

International Men's Day

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  कहते हैं की हर सफल इंसान के पीछे एक औरत का हाथ होता है, लेकिन सच यह भी है की एक सफल औरत के पीछे भी एक मर्द का हाथ होता है, फिर चाहे वह पिता हो, भाई हो, पति हो, चाचा हो, मामा हो, गुरु हो या दोस्त हो | मैं खुशनसीब हूं की मुझे जीवन में पुरुषों का हमेशा सकारात्मक साथ मिला अपने पिता, गुरु, बड़े भाइयों के मार्गदर्शन मैं मैंने बहुत कुछ सीखा आप सभी का  बहुत-बहुत शुक्रिया जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मुझे मेरे हिस्से की ज़मीन और उड़ने को आसमान दिया। एक या दो बुरे अनुभवों के कारण हम समाज के एक बड़े हिस्से को हमेशा गलत की श्रेणी में नहीं रख सकते पुरुष या स्त्री प्रकृति की देन है सृष्टि को संतुलन में रखने के लिए एक तराजू के दो पलड़े हैं, जब दोनों बराबर रहेंगे तभी सब कुछ संतुलित रहेगा। उन सभी पुरुषों का हृदय तल से धन्यवाद जिन्होंने यह साबित किया के समाज आज भी महिलाओं को सम्मान देता है, सुरक्षा देता है और उनकी भागीदारी का सम्मान करता है। मेरे विश्वास को बनाए रखने के लिए दिल से शुक्रिया 🌷

Happy Friendship's Day

                               हप्पी फ्रेंडशिप-डे  यूं तो आज के दिन पूरी दुनिया में फ्रेंडशिप डे की धूम है लेकिन मुझे लगता है कि दोस्ती में जब तक जिंदगी है तब तक हर दिन फ्रेंडशिप डे है और यही समझने में हम अक्सर आधी जिंदगी बिता देते हैं- जैसे मैं। मेरे कुछ दोस्त बचपन से आज तक साथ है कुछ खून के रिश्ते दोस्ती में बदल गए कुछ प्रोफेशनल रिश्ते अब दोस्त बन चुके हैं फिलहाल मैं यह कह सकती हूं कि  हां, मेरे साथ ऐसे दोस्त है जो मेरी बकवास घंटों तक सुनते हैं मेरी बिन सिर पैर की बातों पर मेरे साथ बेवजह हंसते हैं, चेहरा देख कर मेरे साथ हुए कांड का पता लगा लेते हैं,जब लगता है कुछ गलत होने जा रहा मुझसे तो पूरे अधिकार से डांट डपट भी देते हैं मेरी जली कटी सुनते भी हैं अपनी सुनाते भी हैं फिलहाल दोस्तों के साथ जिंदगी गुलजा़र है। गार्गी बिटिया ने घर के बाहर के रिश्तो को अब बनाना शुरू किया है या यूं कहिए की बालपन में रिश्ते अपने आप ही बन जाते हैं। बच्चे मासूम होते हैं उन्हें कुछ भी करना नहीं होता है उनके साथ चीजें अपने ...

Open Letter to Gargi

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 मेरी प्यारी गार्गी, बहुत दिनों बाद आज तुमको फिर यह खुला पत्र (ओपन लेटर) लिख रही हूं, आज का दिन तुम्हारी जिंदगी का महत्वपूर्ण दिन है। समय वाकई बहुत जल्दी बीत रहा है! और उसी समय की धारा के साथ बहते-बहते तुम इतनी बड़ी हो गई कि आज तुम्हारी फॉर्मल स्कूलिंग शुरू हो गई। सबसे पहले, तुम्हें तुम्हारा पहला स्कूल बहुत-बहुत मुबारक हो और मुझे मेरा नया नाम- Gargi's mother ❤️ जब तुम पैदा हुई थी तब भी मैंने एक पत्र तुम्हें लिखा था जिसमें मैंने कहा था कि तुम अपने लिए जीना,अपनी शर्तों पर जीना,अपने लिए कुछ बनना,अपने लिए हासिल करना। मेरा या किसी का नाम रोशन करने के लिए नहीं बल्कि जो करना अपनी संतुष्टि और खुशी के लिए करना। क्योंकि अगर तुमने हमारे लिए या हमारे कहने से कुछ कर भी दिया और तुम जीवन भर असंतुष्ट रहीं तो वो असंतुष्टि तुमको चैन से जीने नहीं देगी। जिंदगी का कोई भी रास्ता सही है या गलत इसका परिचय मैं तुम्हें समय-समय पर कराती रहूंगी पर हर समय नहीं क्योंकि किस रास्ते को चुनना है और चुने हुए रास्ते पर किस तरह आगे बढ़ना है इसकी समझ तुम्हें अपने आप बनानी होगी। जन्म संस्कार और मृत्यु संस्कार से भी ज्या...

पुनरावृति

 तेज बारिश, काले बादल और गरजते बादलों के बीच अपने वजूद को बचाता हुआ एक छोटा सा पेड़ जिसका तना एकदम पतला है और उसी तने से लगी चंद पत्तियों को  उसने बखूबी संभाला हुआ है ! और यह छोटा सा पेड़ हमें कितना कुछ सिखा जाता है ! हमारे आगे पेड़ -पौधे जिनको हम निर्जीव मानते हैं या यह कह लीजिए कि मानव शक्ति के आगे एकदम तिनका मात्र हैं हमें वटवृक्ष जैसी मजबूत सीख दे देते हैं। इन्हें देख कर लगता है आत्मसम्मान को बचाए रखने की प्रबल इच्छा इनमें भी है जो इस बवंडर से तूफान में देखते ही बनती है, किस तरह से हवा का वेग इस पौधे को गिराने के लिए आतुर है और यह वेग से विपरीत सीधा रहने के लिए रहने पर आमादा है। हम रोज ही कभी किसी वजह से कभी बिना कारण तोड़े जाते हैं अपने मन पर अब तक हम ना जाने कितनी ठेस लिए बैठे हैं फिर भी अगर हम बिना बदले की भावना लिए खुद को ऐसी परिस्थितियों से उबारकर अपना सिर ऊंचा करके खुद की जमीन को ठोस बना रहे हैं तो हम अपने आप में सम्मानित हैं । लेट मानसून की पहली बारिश ने जीवन का एक पाठ फिर से याद दिलवा दिया।  देर आए दुरुस्त आए!