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हर देश की अपनी एक विशेषता है, मेरे देश की विशेषता है इसकी भिन्नता| "परी हो तुम गुजरात की, रूप तेरा मद्रासी ! सुन्दरता कश्मीर की तुम में, सिक्किम जैसा शर्माती !! खान-पान पंजाबी जैसा, बंगाली जैसी बोली ! केरल जैसी आंख तुम्हारी, है दिल तो तुम्हारा दिल्ली !! महाराष्ट्र तुम्हारा फ़ैशन है, तो गोवा नया जमाना ! खुशबू हो तुम कर्नाटक की, बल तो तेरा हरियाणा !! सीधी-सादी उड़ीसा जैसी, एम.पी. जैसा मुस्काना ! दुल्हन तुम राजस्थानी जैसी, त्रिपुरा जैसा इठलाना !! झारखंड तुम्हारा आभूषण, तो मेघालय तुम्हारी बिन्दीया है ! सीना तुम्हारा यू.पी है तो, हिमाचल तुम्हारी निन्दिया है !! कानों का कुंडल छत्तीसगढ़, तो मिज़ोरम तुम्हारी पायल है, बिहार गले का हार तुम्हारा, तो आसाम तुम्हारा आंचल है !! नागालैंड- आन्ध्र दो हाथ तुम्हारे, तो ज़ुल्फ़ तुम्हारी अरुणाचल है ! नाम तुम्हारा भारत माता, तो पवित्र तुम्हारा उत्तरांचल है !! सागर है परिधान तुम्हारा, तिल जैसे है दमन-द्वीव ! मोहित हो जाता है सारा जग, रहती हो तुम कितनी सजीव !! अंडमान और निकोबार द्वीप, पुष्पों का गुच्छ तेरे बालों में ! झिल-मिल, झि...

खुद को परखें

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                                                                                          खुद को परखें अमूमन बचपन में हम सब के पास चाबी वाले खिलौने रहे होंगे अौर उसकी कार्य प्रणाली से भी हम सब वाकिफ हैं | इसका सीधा साधा फार्मूला है कि हमने चाबी भरी और उस खिलौने को चलाया, जितनी चाबी भरी उतना ही खिलौना चलता है, चाहे वह कलाबाज़ी करने वाला बंदर हो, ड्रम या झुनझुना बजाने वाला जोकर या कमर मटका कर नाचने वाली गुड़िया | वैसे हर खिलौने की क्षमता या कार्यप्रणाली खेलने वाले पर ही निर्भर होती है लेकिन चाबी वाले खिलौने मुझे बचपन से ही विचित्र मालूम होते थे | कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरे अंदर यह विचार कहीं ना कहीं पनप रहा था कि आगे चलकर हमारी चाबी भी किसी और के हाथ में ना चली जाए ! और आज शायद हुआ भी वही | आज जो हम बनते जा रहे हैं वो दूसरों की ही देन है, क्योंकि हम जो वास्तविकत...